ग़ज़ल

http://kavita.hindyugm.com/2010/10/blog-post_17.html http://kavita.hindyugm.com/2010/10/blog-post_24.html गज़ल   फूल के अस्मिता बचावे के कांट चारो तरफ उगावे के ए जी ! बाटे बहार गुलशन में आईं सहरा में गुल खिलावे के ऊ जे तूफान के बुझा देवे एगो अइसन दिया जरावे के एह दशहरा में कवनो पुतला ना मन के रावण के तन जरावे के तय कइल ई बहुत […]

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