हिन्दी कविता

Bhawuk on October 19th, 2010

अबकी आए ऐसा नया साल हो जाए हर गाँव शहर खुशहाल भइया के मुँह से फूटे संगीत भौजी के कंगना से खनके ताल आए रे आए ऐसा मधुमास फूल खिलाए ठूंठ पेड़ के डाल झूम-झूम के नाचे मगन किसान इतना लदरे जौ गेहूँ के बाल दिन सोना के चाँदी के हो रात हर अंगना मे […]

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