केदारनाथ सिंह

”भोजपुरी के झंडा तोहरा हाथ में बा.ओकरा के देश में फहरावs”—केदारनाथ सिंह ”अमरे होखे खातिर सरहद बनावल गइल बा , का ए हमार बाबू ‘. इस कविता ने एक बूढ़ी मां के कोख के दर्द को उकेर दिया।मनोज भावुक ने काव्य पाठ शुरु किया तो पूरा माहौल,शहीद बेटे की बूढ़ी मां के व्यथा को सुन […]

Continue reading about अमरे होखे खातिर सरहद बनावल गइल बा का, ए हमार बाबू