Bhawuk on February 20th, 2013
Manoj Bhawuk Police Officer in Movie

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Bhawuk on February 19th, 2013
Manoj Bhawuk’s unique journey

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Bhawuk on February 19th, 2013
Renowned Bhojpuri Ghazal Writer Manoj Bhawuk

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Bhawuk on February 19th, 2013
I am not new to Bhojpuri Film industry - Manoj Bhawuk

I am not new to Bhojpuri Film industry – Manoj Bhawuk

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हिन्दी साहित्य को आवाज की दुनिया से जोड़ने और पॉडकास्टिंग को प्रोत्साहित करने के लिए हिन्दी की चर्चित वेबपत्रिका ‘हिन्दयुग्म’ द्वारा आयोजित दूसरे ‘गीतकॉस्ट प्रतियोगिता’ के विजेता बने हैं धर्मेंद्र कुमार सिंह। ‘गीतकॉस्ट प्रतियोगिता’ में हिन्दी के महान कवियों की कविताओं को सुरबद्ध और संगीतबद्ध किया जाता है।

इस श्रृंखला में पहला सफल प्रयोग जयशंकर प्रसाद की कविता ‘अरुण यह मधुमय देश हमारा‘ को सुरबद्ध और संगीतबद्ध कर किया गया। इसमें धर्मेंद्र तीसरे स्थान पर आए थे। प्रतियोगिता की दूसरी कड़ी के लिए सुमित्रा नंदन पंत की कविता ‘प्रथम रश्मि का आना रंगिणी’ का चयन किया गया। इस कविता को दुनिया के कई देशों के गायकों ने सुरबद्ध और संगीतबद्ध किया। प्रतियोगिता का परिणाम घोषित किया गया।
प्रथम रश्मि’ के लिए आयोजित इस ‘गीतकास्ट प्रतियोगिता’ के विजेता बने धर्मेन्द्र कुमार हिंदी-भोजपुरी के युवा गायक हैं। वे स्टेज, रेडियो, दूरदर्शन और विभिन्न चैनलों पर कार्यक्रम पेश कर चुके हैं। धर्मेंद्र फुर्सत के क्षणों में भोजपुरी के स्तरीय गीतों और गज़लों को आवाज देने में लगे रहते हैं। धर्मेंद्र से संपर्क 09650781178 के जरिए किया जा सकता है।
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पंत जी की ‘प्रथम रश्मि का आना रंगिणी’ धर्मेंद्र की आवाज में सुनने के लिए क्लिक करें-

सुमित्रानंदन पंत की प्रसिद्ध कविता ‘प्रथम रश्मि’ को धर्मेंद्र की आवाज में सुने

 

 

जयशंकर प्रसाद की प्रसिद्ध कविता ‘अरुण यह मधुमय देश हमारा’ को धर्मेंद्र की आवाज में सुनने के लिए क्लिक करें-

मिट्टी से लगाव ने इंजीनियर को बनाया अभिनेता

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Manoj Bhawuk News in Dainik Jagran Bihar

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– मनोज भावुक

mkg-tn001शुरुवाती 14 वर्षों की बात छोड़ दें जब भोजपुरी फिल्म निर्माण की ज़मीन तैयार हुई थी तो भी भोजपुरी सिनेमा अब 50 साल का प्रौढ़ हो चुका है, लेकिन उम्र के इस पड़ाव पर भी इसमें प्रौढ़ावस्था वाली गंभीरता नहीं दिख रही है। जैसे-जैसे इसकी उम्र बढ़ी है, लड़कपन बढ़ता गया है। ये इसका ऐसा लड़कपन है, जिसे समय और इतिहास कभी माफ नहीं कर सकेंगे और अब तो इस पर ये कहावत भी चरितार्थ हो रही है कि जिस डाल पर बैठे हैं, उसी को काट रहे हैं। मैं भोजपुरी सिनेमा पर पिछले डेढ़ दशक से लिख रहा हूं। पिछले डेढ़ दशक में अखबारों, पत्रिकाओं और टीवी चैनल्स के लिए 50 से ज्यादा फ़िल्मी हस्तियों के साक्षात्कार करने और अब तक करीब 50-60 भोजपुरी फिल्मों को कई-कई बार देखने के बाद, फिर से कुछ लिखने का विचार मन में आया है। इसी वर्ष 2012 में मैने भोजपुरी सिनेमा के इतिहास पर एक डाक्यूमेंट्री भी बनाई जिसमें 1948 से लेकर 2011 तक के फिल्मों पर विहंगम दृष्टि है और 20 बड़ी फ़िल्मी हस्तियों के बाइट्स हैं. 25 मार्च 2012 को दिल्ली में आयोजित विश्व भोजपुरी सम्मलेन के फ़िल्म सत्र में फिल्म, साहित्य, राजनीति और संगीत जगत की जानी मानी हस्तियों ने लाखों दर्शकों के साथ इस डाक्यूमेंट्री को देखा और सराहा.

आइए भोजपुरी सिनेमा के इस सफरनामे पर एक बार फिर विचार किया जाए कि आज हम कहां से कहाँ पहुचे हैं।

फिल्मी दुनिया में भोजपुरी का प्रवेश

फिल्मी दुनिया में भोजपुरी के प्रवेश की कहानी बड़ी रोचक है। मुंबई के फिल्म संसार में भोजपुरी का प्रवेश भोजपुरी गीतों के माध्यम से हुआ और इसका श्रेय अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मलेन के भूतपूर्व अध्यक्ष मोती बीए को जाता है। सन 1948 में एक फिल्म बनी नदिया के पार, जिसके निर्देशक थे किशोर साहू। ये फिल्म मछुआरों और मल्लाहों की जिंदगी पर आधारित थी, जिसके संवाद अवधी में थे और इसके 8 गीत भोजपुरी में थे। इसमें से अधिकांश गीत दिलीप कुमार और कामिनी कौशल पर फिल्माये गये थे। इन गीतों को मोती बीए ने लिखे थे। आलम ये था कि इन गीतों को जिसने भी सुना है, इनकी तारीफ किये बिना नहीं रह सका है। इन गीतों को सुनकर लोगों के मुंह से अनायास ही हाउ स्वीट, हाउ स्वीट निकलता था। फिर क्या था, लोगों को भोजपुरी गीतों का चस्का लग गया और इसके साथ ही हिंदी फिल्मों में भोजपुरी गीत रखे जाने का रिवाज चल गया। जरा कल्पना कर के देखिए – बंगाली, पंजाबी, गुजराती और मराठी माहौल में भोजपुरी का ये शानदार प्रवेश कितना सुखदायी रहा होगा। भोजपुरिया स्वाद लोगों को अच्छा लगा तो हिंदी सिनेमा में इसका इस्तेमाल चखना के रूप में होने लगा। लेकिन लोगों को हिंदी फिल्मों में भोजपुरी के गीत या भोजपुरिया टोन या इसका मिजाज तो अच्छा लगा, मगर पूरी की पूरी फिल्म भोजपुरी में बनाने के लिए कोई भी तैयार न था।

पहली फिल्म गंगा मइया तोहे पियरी चढ़इबो

mkg-tn002अभी तक आपने देखा कि 1948 में जब फिल्मकारों को ये पता चल गया कि भोजपुरी में जादू है और इसकी मिठास लोगों को ललचा रही है… ये उस घी की तरह है, जो जिस किसी भी भोजन में डाल दिया जाए, उसे स्वादिष्ट बना देता है। नतीजा ये हुआ कि हिंदी फिल्मकार भोजपुरी का इस्तेमाल सिर्फ छौंक लगाने के लिए करने लगे। कोई भी एक संपूर्ण भोजपुरी फिल्म बनाने के लिए तैयार नहीं था। लंबे इंतजार के बाद आखिरकार वो शुभ घड़ी भी आयी, जब भोजपुरी फिल्म के लिए अनिश्चित काल तक बंद पड़ा निर्माण द्वार हमेशा-हमेशा के लिए खुल गया। इस बारे में पत्रकार आलोक रंजन ने भोजपुरी चलचित्र संघ की स्मारिका में लिखा है कि “16 फरवरी 1961 भोजपुरी सिनेमा के लिए एक ऐतिहासिक तिथि थी। आज के दिन पटना के शहीद स्मारक में भोजपुरी की पहली फिल्म ‘गंगा मइया तोहे पियरी चढ़इबो’ का मुहूर्त समारोह संपन्न हुआ था और उसकी अगली सुबह इस फिल्म की शूटिंग शुरू की गयी। आज सोच सकते हैं कि हिंदी फिल्म के क्षितिज पर एक नया शक्ति का उदय कितना क्रांतिकारी कदम रहा होगा। वो भी ऐसे समय में जब किसी से भोजपुरी फिल्म बनाने के बारे में बात करना भी बेवकूफ बनने की तरह था। लेकिन हर युग में ऐसे बेवकूफ और सनकी होते हैं, जो युग निर्माण करते हैं। ऐसे ही एक सनकी थे नाजिर हुसैन, जिनको आज भोजपुरी सिनेमा का भीष्म पितामह कहा जाता है। नाजिर साहब भोजपुरी फिल्म बनाने के लिए बेचैन थे। भोजपुरी फिल्म बनाने की प्रेरणा उनको देशरत्न डा राजेंद्र प्रसाद से मिली। राजेंदर बाबू के सामने जब नाजिर साहब ने अपने मन की बात रखी, तो राजेंद्र बाबू ने कहा था कि आपकी बात तो बहुत अच्छी है लेकिन इसके लिए बहुत हिम्मत चाहिए। और उतनी हिम्मत अगर आप में हो तो फिल्म जरूर बनाइए। इतनी हिम्मत नाजिर साहब के पास थी। उन्होंने एक स्क्रिप्ट लिखी, जिसका नाम रखा, गंगा मइया तोहे पियरी चढ़इबो और फिर वक्त की रफ्तार के साथ निर्माता ढूंढने की उनकी कोशिश अनवरत जारी रही। ये अंधेरे से उजाले की ओर एक ऐसा सफर था, जिसकी सुबह कब, कहां और कैसे होगी, ये किसी को भी नहीं पता था। चारों तरफ बस एक दर्दीला सन्नाटा पसरा था। इसी मुश्किल सफर में नाजिर साहब के हमसफर बने – निर्माता के रूप में विश्वनाथ शाहाबादी, निर्देशक के रूप में कुंदन कुमार, हीरो के रूप में असीम कुमार और हिरोइन के रूप में कुमकुम। ये काफिला जब आगे बढ़ा, तो इसमें रामायण तिवारी, पदमा खन्ना, पटेल और भगवान सिन्हा जैसी शख्सियत भी शामिल हो गये। गीत का जिम्मा शैलेंद्र ने उठाया तो संगीत के जिम्मेदारी ली चित्रगुप्त जी ने। फिर क्या था, फिल्म गंगा मइया तोहे पियरी चढ़इबो बनी और 1962 में रीलीज हुई। नतीजा ये कि गांव तो गांव, शहर के लोग भी खाना-पीना भूल गये। जो वितरक इस फिल्म को लेने से ना-नुकुर कर रहे थे, अब दांतो तले अंगुली काटने लगे थे। लोग जहां-तहां बतियाने लगे थे – गंगा नहाओ, विश्वनाथ जी के दर्शन करो और तब घर जाओ। इस फिल्म की खासियत थी, दर्शक से इसकी आत्मीयता, दहेज, बेमेल विवाह, नशाबाजी, सामंती संस्कार और अंधविश्वास से निकली समस्या, जो भोजपुरिया लोगों को अपनी जिंदगी की समस्या लग रही थी। गीतकार शैलेंद्र और संगीतकार चित्रगुप्त ने गीतों को इतना मोहक बनाया कि गीत गली-गली बजने लगे।

भोजपुरी फिल्म (1962 से 1967)

पहली भोजपुरी फिल्म गंगा मइया तोहे पियरी चढ़इबो के गीत पूर्वोत्तर भारत के गांव-गांव में गूंजने लगे। पांच लाख की पूंजी से बनी ‘गंगा मइया…’ ने लगभग 75 लाख रुपये का व्‍यवसाय किया। इसे देखकर कुछ व्यवसायी लोग भोजपुरी फिल्म को सोने के अंडे देने वाली मुर्गी समझने लगे। नतीजा ये निकला कि भोजपुरी फिल्म निर्माण का जो पहला दौर 1961 से शुरू हुआ, वो 1967 तक ही चला। इस दौर में दर्जनों फिल्में बनीं, लेकिन लागी नाही छूटे राम और बिदेसिया को छोड़ कर कोई भी फिल्म अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पायी। इन दोनों फिल्मों के गीत कमाल के थे।

दस साल (1967-1977) की चुप्पी

mkg-tn0031967 के बाद दस साल तक भोजपुरी फिल्म निर्माण का सिलसिला ठप रहा। 1977 में बिदेसिया के निर्माता बच्चू भाई साह ने इस चुप्पी को तोड़ने का जोखिम उठाया। उन्‍होंने सुजीत कुमार और मिस इंडिया प्रेमा नारायण को लेकर पहली रंगीन भोजपुरी फिल्म दंगल का निर्माण किया। नदीम-श्रवण के मधुर संगीत से सजी दंगल व्यवसाय के दंगल में भी बाजी मार ले गयी।

भोजपुरी फिल्म की इस धमाकेदार शुरुआत के बावजूद दस साल 1967 से 1977 तक भोजपुरी फिल्मों का निर्माण लगभग बंद रहा। भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री की ये हालत भोजपुरिया संस्कार और संस्कृति की भोथरी छूरी से हत्‍या करने वाले फिल्मकारों के चलते हुई। 1967 से 1977 के अंतराल में जगमोहन मट्टू ने एक फिल्म मितवा भी बनायी, जो कि 1970 में उत्तर प्रदेश और 1972 में बिहार में प्रदर्शित की गयी। इस तरह से ये फिल्म पहले और दूसरे दौर के बीच की एक कड़ी थी।

भोजपुरी फिल्म (1977 से 1982)

mkg-tn0041977 में प्रदर्शित दंगल की कामयाबी ने एक बार फिर नाजिर हुसैन को उत्प्रेरित कर दिया। उन्‍होंने राकेश पांडेय और पद्मा खन्ना को शीर्ष भूमिका में लेकर बलम परदेसिया का निर्माण किया। अनजान और चित्रगुप्त के खनखनाते गीत-संगीत से सुसज्जित बलम परदेसिया रजत जयंती मनाने में सफल हुई। तब इस सफलता से अनुप्राणित होकर भोजपुरी फिल्म के तिलस्मी आकाश में निर्माता अशोक चंद जैन का धमाकेदार अवतरण हुआ और उनकी फिल्म धरती मइया और गंगा किनारे मोरा गांव ने हीरक जयंती मनायी। भोजपुरी फिल्म निर्माण का ये दूसरा दौर 1977 से 1982 तक चला। 1983 में 11 फिल्मे बनीं, जिनमें मोहन जी प्रसाद की हमार भौजी, 1984 में नौ फिल्‍में बनीं, जिसमें राज कटारिया के भैया दूज, 1985 में 6 फिल्में बनीं, जिनमें लाल जी गुप्त की नैहर के चुनरी और मुक्ति नारायण पाठक की पिया के गांव, इसके अलावा 1986 में 19 फिल्में बनीं, जिनमें रानी श्री की दूल्हा गंगा पार के हिट रही, जिन्‍होंने भोजपुरी फिल्म व्यवसाय को खूब आगे बढ़ाया।

भोजपुरी सिनेमा का नया युग

mkg-tn0071982 से 2002 तक हालात ये हो गये कि कब फिल्म बनी और कब पर्दे से उतर गयी, इसका पता ही नहीं चलता था। ये समय भोजपुरी सिनेमा के लिए सबसे बुरा रहा। 2003 में मनोज तिवारी की ससुरा बड़ा पैसावाला के सुपर-डुपर हिट होने के बाद भोजपुरी सिनेमा का कायाकल्प हो गया। 2003 के बाद के समय को भोजपुरी सिनेमा का नया युग या वर्तमान दौर कहा जाता है। आइए, अब इस दौर के बारे में बात की जाए। 2003 में मनोज तिवारी और रानी चटर्जी अभिनीत फिल्म ससुरा बड़ा पैसावाला सुपर-डुपर हिट हुई। इसी समय मोहन जी प्रसाद ने रवि किशन को लेकर सैयां हमार और सैयां से कर द मिलनवा हे राम, दो फिल्में बनायी। दोनों फिल्मों ने अच्छा बिजनेस किया लेकिन मोहन जी प्रसाद की ही अगली फिल्म पंडित जी बताईं ना वियाह कब होई, सुपर-डुपर हिट हुई। फिर तो भोजपुरी सिनेमा की किस्मत ही जाग गयी। अमिताभ बच्चन, अजय देवगन, जूही चावला, मिथुन चक्रवर्ती जैसे हिंदी के नामी कलाकार भोजपुरी फिल्‍मों में काम करने लगे। भोजपुरी फिल्मों का बजट बढ़ गया और इसकी शूटिंग लंदन, मॉरिशस और सिंगापुर में होने लगी। इस दौरान हिंदी के कई बड़े निर्माता-निर्देशक सुभाष घई, सायरा बानो और राजश्री प्रोडक्शन जैसे ग्रुप भोजपुरी फिल्‍में बनाने के लिए अग्रसर हुए। रवि किशन और मनोज तिवारी के अलावा भोजपुरी सिनेमा के आकाश पर कई नये हीरो चमके। दिनेश लाल यादव निरहुआ, पवन सिंह, पंकज केसरी, विनय आनंद, कृष्णा अभिषेक और नयी हिरोइनों रानी चटर्जी, नगमा, भाग्यश्री, दिव्या देसाई, पाखी हेगड़े, रिंकू घोष, मोनालिसा, श्वेता तिवारी जैसे कलाकारों की दस्तक से भोजपुरी सिनेमा ने रफ्तार पकड़ लिया। इसी समय में कल्पना जैसी गायिका भी उभर कर आयी। साल 2009 भोजपुरी मनोरंजन जगत के लिए काफी चर्चा में रहा। एक लंबे इंतजार के बाद हमार टीवीमहुआ समेत भोजपुरी के कई चैनल आये। भोजपुरी फिल्म की ट्रेड मैगजीन भोजपुरी सिटी, भोजपुरी संसार समेत कई फिल्मी पत्रिका शुरू हुई। वहीं साल की सबसे बड़ी क्षति रही ससुरा बड़ा पैसवाला के निर्माता सुधाकर पांडेय की आकस्मिक मौत।

भोजपुरी सिनेमा 2010

mkg-tn014अब बात कर ली जाए भोजपुरी सिनेमा के साल 2010 की। 2010 भोजपुरी सिनेमा के लिए न तो बहुत अच्छा रहा, न ही बहुत खराब। इस साल की सबसे बड़ी उपलब्धि रही, मनोज तिवारी की फिल्म भोजपुरिया डॉन को अंतर्राष्ट्रीय फिल्म फेस्टिवल में मिला आमंत्रण। साथ ही भोजपुरी के दो स्टार मनोज तिवारी और श्वेता तिवारी का बिग बॉस सीजन 4 में जाना। 2010 में निर्माता प्रवेश सिप्पी जैसे फिल्मकार भी भोजपुरी सिनेमा जगत में आ गये। उनकी फिल्म मृत्‍युंजय पहली बार पूरे देश में एक साथ प्रदर्शित की गयी। इस फिल्म की नायिका रिंकू घोष ने फिल्म विदाई से भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री में जो मुकाम बनाया, वो आज भी बरकरार है। मनोज तिवारी ने भोजपुरिया डॉन से वर्ष 2010 में दो साल बाद वापसी की, जिसका फायदा इस फिल्म के साथ-साथ मनोज तिवारी को भी मिला। नयी हिरोइन में इस साल गुंजन पंत ने अपनी फिल्म मार देब गोली केहू ना बोली से टाप थ्री में जगह बनायी। भोजपुरी के एक और सुपर स्टार विनय आनंद ने ननिहाल जैसी फिल्म के जरिये अपनी स्थिति मजबूत की। अनारा गुप्ता और संजय पांडेय ने भी कई हिट फिल्में दीं। पवन सिंह और मोनालिसा की एक और कुरुक्षेत्र चर्चा में रही। अगर फिल्म वितरण के हिसाब से देखा जाए, तो इस साल अच्‍छी कमाई करने वाली फिल्म में देवरा बड़ा सतावेला, दाग, दामिनी, सात सहेलियां के नाम लिये जा सकते हैं। इन सब फिल्मों ने दो करोड़ से तीन करोड़ तक का व्यवसाय किया। साथ ही भइया के साली ओढ़निया वाली, सैयां के साथ मड़ैया में, लहरिया लूट ए राजाजी, जरा देब दुनिया तोहरा प्यार में, आज के करण-अर्जुन और रणभूमि ने भी अच्‍छी कमाई की। लेकिन हमार माटी में दम बा, धर्मात्मा, बलिदान, तू ही मोर बालमा फिल्म से उसके निर्माता को निराशा ही हाथ लगी। इसके बाद दिल, साथी रे, चंदू की चमेली ,तेजाब, किशना कइलस कमाल ने भी निराश किया।

mkg-tn013हिट-सुपर हिट की दृष्टि से देखा जाए, तो निरहुआ नंबर वन पर रहा। दाग, सात सहेलियां, आज के करण-अर्जुन, शिवा निरहुआ की इस साल की सफल फिल्‍में है। इस बीच पवन सिंह जहां थे, वहां से आगे जरूर बढ़े हैं। देवरा बड़ा सतावेला, सैयां के साथ मड़ैया में और भइया के साली ओढ़निया वाली से पवन का मार्केट बढ़ा है। रवि किशन की फिल्मों की बात की जाए, तो देवरा बड़ा सतावेला, लहरिया लूट ए राजाजीजरा देब दुनिया तोहरा प्यार में ने ठीक-ठाक बिजनेस किया। अभिनेत्रियों की बात की जाए तो इस साल पाखी हेगड़े और मोनालिसा के लिए काफी अच्छा रहा। वर्ष 2010 में कुल 25 फिल्‍में ही पूरे भारत में रीलीज हो पायीं, लेकिन निर्माता रमाकांत प्रसाद, राजकुमार पांडेय, दिलीप जायसवाल और अभय सिन्हा ने व्यावसायिकता के साथ-साथ प्रयोगवादी फिल्म भी बनाये। वर्ष 2010 जहां भोजपुरी सिनेमा के लिए सुखद रहा, वहीं टू पीस बिकनी वाली जैसी कई फिल्‍में पानी मांगने के लिए भी तरस गयीं। इससे ये बात तो साफ है कि भोजपुरी सिनेमा के दर्शक अब जागरूक हो रहे हैं और भोजपुरी की अस्मिता के साथ खिलवाड़ उनको बर्दाश्‍त नहीं है। आने वाले साल इस साल से सबक जरूर लेंगे और बेहतरीन फिल्‍में बनेंगी, ऐसी उम्‍मीद की जा सकती है।

भोजपुरी सिनेमा 2011

mkg-tn012वर्ष २०११ भोजपुरी सिनेमा के स्वर्णिम वर्ष के रूप में मनाया गया . कहीं भोजपुरी फिल्म अधिवेशन , कहीं भोजपुरी फिल्म अवार्ड तो कहीं भोजपुरी सिटी सिने अवार्ड . मतलब सालो भर भोजपुरी फिल्म उत्सव रहां . दिल्ली में आयोजित विश्व भोजपुरी सम्मलेन में भी फिल्म पर विशेष सत्र रखा गया तो पटना में वर्ष के शुरुआत में हीं स्वर्णिम भोजपुरी के रूप में भोजपुरी सिनेमा पर तीन दिवसीय कार्यक्रम आयोजित हुआ जिसमें भोजपुरी फिल्मों के दिग्गजों ने शिरकत कइल किया . भोजपुरी सिनेमा के अर्ध सदी के इस सुनहले सफ़र पर आयोजित सेमीनार का संचालन मैंने हीं किया था जिसमें अभिनेता मनोज तिवारी , रवि किसन, निर्माता अभय सिन्हा , टी पी अग्रवाल, कुणाल सिंह , शारदा सिन्हा , मालिनी अवस्थी और निर्देशक अजय सिन्हा समेत कई कलाकारों ने अपने उदगार व्यक्त किया .

अब बात वर्ष २०११ के सफल फिल्मों की. इस वर्ष निर्देशक राजकुमार पाण्डेय की ट्रक ड्राईबर , निर्माता आलोक कुमार की गायक से हीरो बने खेसारी लाल की फिल्म साजन चले ससुराल और निरहुआ इंटरटेनमेंट के बैनर तले बनी पारिवारिक फिल्म औलाद ने अच्छा बिजनेस किया .

निर्देशक असलम शेख के औलाद की सफलता इस बात को साबित करती है कि आज भी भोजपुरी में पारिवारिक फिल्म डिमांड में है , जरूरत है सही प्रस्तुतीकरण की . इसी साल हैदर काजमी की रंगबाज और मनोज पाण्डेय की मै नागिन तू नगीना की सफलता ने इस भ्रम को भी तोड़ दिया कि बिना स्टार के फिल्में नहीं चलती . अगर स्टार के फिल्मों की बात की जाय तो मनोज तिवारी और संगीता तिवारी की इन्साफ , निर्माता रमाकांत प्रसाद की निरहुआ और विराज भट्ट अभिनीत दिलजले भी सफल रहीं.

अब बात कुछ ऎसी भोजपुरी फिल्मों की जो लीक से हट के बनी और जिनका खूब प्रचार -प्रसार भी हुआ फिर भी दर्शकों की उम्मीदों पर खरा नहीं उतर सकी . नीतू चंद्रा की देसवा खूब चर्चा में रही लेकिन बॉक्स ऑफिस पर उसे कामयाबी नहीं मिली ……वही हाल निर्देशक किरण कान्त वर्मा की फिल्म हमार देवदास का हुआ. भोजपुरी में बनी देवदास लचर प्रस्तुतीकरण, अनाकर्षक सेट और धीमी गति के कारण फ्लाप हो गई . दरअसल फिल्म की कहानी के हिसाब से उसका बजट जरुरी होता है ..अन्यथा दर्शक उस फिल्म को नकार देते हैं . साहित्यिक कृति पर भी एक फिल्म बनी — सैंया डराईबर बीबी खलासी. फिल्म साफ़ सुथरी थी लेकिन नाम देखकर लोगों को लगा कि मसाला फिल्म है . अब जो चिकेन खाए जायेगा उसे आलू गोभी की सब्जी खिलाएंगे तो क्या होगा … यह फिल्म भी फ्लाप हो गई . ..लेकिन असफल के बावजूद इन तीनो फिल्मों का ऐतिहासिक महत्व है .

भोजपुरी सिनेमा 2012 –

mkg-tn001भोजपुरी मीडिया डॉट कम के अनुसार वर्ष 2012 में प्रदर्शित हुई 55 फिल्मो में मात्र दो फिल्मे ही सुपर हिट साबित हुई जबकि दस फिल्मो ने औसत व्यवसाय किया . बाकी की फिल्मे दर्शको को खींचने में नाकाम साबित हुई . इस वर्ष पहली प्रदशित फिल्म रही रवि किशन की केहू हमसे जीत ना पायी व लोकगायक गुडडू रंगीला की “ससुरो कब्बो दामाद रहल ” . 26 जनवरी को प्रदशित हुई इस फिल्म को दर्शको ने बुरी तरह नकारा व फिल्म फ्लॉप रही … फिर 3 फरवरी को निरहुआ – पवन सिंह स्टार “खून पसीना” प्रदशित हुई … इस फिल्म ने बिहार, मुंबई में बेहतरीन व यू पी में औसत व्यवसाय किया लेकिन लागत वसूलने में फिल्म असफल रही . इसी के साथ प्रदशित हुई “अचल रहे सुहाग” बुरी तरह फ्लॉप रही … 17 फरवरी को प्रदशित हुई प्रवेशलाल यादव स्टार “राजा के रानी से प्यार हो गईल” और नये कलाकारों से सजी “देवता” को दर्शक नहीं मिले ….होली पर प्रदशित हुई रानी चटर्जी स्टार “दुर्गा ” ने पुरे बिहार, मुंबई में अच्छा व्यवसाय किया … इसी दिन रिलीज़ हुई रवि किशन – रानी चटर्जी स्टार “कईसन पियवा के चरितार बा” और रवि किशन अक्षरा सिंह की प्राण जाये पर वचन ना जाये भी औसत व्यवसाय करने में सफल रही।

फिर 23 मार्च को मुंबई व 30 मार्च को बिहार में प्रदशित हुई मनोज तिवारी -पाखी हेगड़े स्टार “भईया हमार दयावान” प्रदशित हुई बुरी तरह फ्लॉप रही ….30 मार्च को मुंबई व बिहार में प्रदशित हुई “बिदेसिया” बुरी तरह फ्लॉप रही … 6 अप्रैल को प्रदशित हुई “जान तेरे नाम” ने पुरे बिहार में शानदार व्यवसाय किया … खेसरीलाल के इस फिल्म ने बिहार के कई सिनेमाघरों में पचास दिन पुरे किये व सिर्फ बिहार से ही 1 करोड़ से अधिक का व्यवसाय किया ….”जान तेरे नाम ” ने यू पी में ऐतिहासिक व्यवसाय किया लेकिन मुंबई में यह फिल्म व्यवसाय करने में असफल रही । अप्रैल में ही प्रदशित हुई मनोज पाण्डेय स्टार “राजाजी”, विक्रांत सिंह स्टार “मेहरारू बिना रतिया कईसे कटी” विराज भट्ट – रानी चटर्जी स्टार “काहे कईल हमसे घात” विनय आनंद स्टार “ऐलान-ए-जंग” बुरी तरह फ्लॉप रही। 10 मई को प्रदशित हुई अलोक कुमार की खेसारीलाल – स्मृति सिन्हा व अंजना सिंह की ” देवरा पे मनवा डोले” ने बढ़िया ओपनिग ले कर अच्छा व्यवसाय किया व हिट के पायदान पर पहुची। 18 मई को प्रदशित हुई विनय आनंद स्टार “पागल प्रेमी” शानदार पबिलासिटी के बावजूद औसत व्यवसाय भी नहीं कर पायी व असफल रही। 18 मई को ही आई पवन सिंह स्टार “बजरंग” भी नकाम रही। 25 मई को प्रदशित हुई रवि किशन ” रणबीर” अच्छा व्यवसाय नहीं कर पाई। कोर्ट के रोक के चलते देर हुई भोजपुरी फिल्म “सौगंध गंगा मईया के” औसत व्यवसाय ही कर पायी . 1 जून को आई “बुलंदी” बुरी तरह फ्लॉप रही। 8 जून को प्रदशित हुई खेसारीलाल – अंजना सिन्हा स्टार “दिल ले गईल ओढनिया वाली वाली” ने भी बिहार में औसत व्यवसाय किया, लेकिन मुंबई में यह फिल्म जबरदस्त रही . व यू पी में भी ठीक रही व हिट का मुकाम पाया। 8 जून को ही आई पंकज केसरी स्टार “प्यार मोहब्बत जिंदाबाद” से दर्शको ने कोई प्यार नहीं किया। 15 जून को विराज भट्ट ” जानवर” प्रदशित हुई। यह फिल्म भी कोई कोई ख़ास करिश्मा नहीं कर पायी . । वही 15 जून को ही आई “कलुआ भईल सयान” को भी दर्शको ने नकार दिया ।

29 जून को आई “रंगबाज राजा” भी कोई करिश्मा नहीं कर सकी। 29 को ही आई “भाई जी ” भी कुछ खास नहीं रही। 6 जुलाई को आई विराज भट्ट स्टार ” दिल त पागल होला” फ्लॉप हुई वही 13 जुलाई को बिहार, यू पी में प्रदशित हुई “हीरो” बॉक्स ऑफिस पर औसत व्यवसाय कर पायी। जुलाई में आई “नंदू निकम्मा” व विराज भट्ट स्टार “खुद्दार” बुरी तरह फ्लॉप रही वहीं पवन सिंह स्टार “डकैत” ने बिहार व मुंबई में अच्छा व्यवसाय किया . 17 अगस्त को ईद के अवसर पर प्रदशित हुई निरहुआ स्टार “एक बिहारी सो पे भारी” बॉक्स ऑफिस पर शानदार ओपनिंग दी . वहीँ 24 अगस्त को प्रदशित रवि किशन – रानी चटर्जी “ज्वालामंडी ” ने औसत व्यवसाय किया। 31 अगस्त को प्रदशित हुई “कालिया” बुरी तरह नाकाम रही। 7 सितम्बर को प्रदशित हुई पवन सिंह स्टार “लावारिस” ने औसत व्यवसाय किया वहीँ साथ ही प्रदशित हुई “लव यू सजना” फ्लॉप रही। 14 सितम्बर को आई अमिताभ बच्चन, जया बच्चन, निरहुआ, पाखी स्टार “गंदादेवी” पूरे भारत में एक साथ प्रदशित हुई, लेकिन फिल्म बुरी तरह फ्लॉप हो गयी .. 28 सितम्बर को प्रदशित हुई पवन सिंह स्टार ” डोली चढ़ के दुलहन ससुराल चली” और विराज भट्ट स्टार ” मर्द तांगावाला” बुरी तरह नाकाम रही। 5 अक्तूबर को प्रदशित हुई रानी चटर्जी स्टार धड़केला करेजवा तोहरे नामे” औसत व्यवसाय की। सुदीप पाण्डेय स्टार “गजब सिटी मरे सईया पिछवारे” बहुत ही बड़ी फ्लॉप रही। 12 अक्दुबर को प्रदशित हुई रानी चटर्जी स्टार “चिंगारी बुझ गयी” और विनय आनंद स्टार “आज के दबंग दामाद” भी नाकाम रही। दुर्गा पूजा पर प्रदशित हुई न्रिहुआ – पाखी स्टार “रिक्शावाला आई लव यू, निरहुआ – पवन स्टार “एक दूजे के लिए” व विराज भट्ट स्टार “हिम्मतवाला” में हिम्मतवाला बुरी तरह फ्लॉप रही। रिक्शावाला आई लव यू, बिहार में पीट गयी लेकिन यू पी में शानदार व्यवसाय किया . “एक एक दूजे के लिए” भी अपनी लागत वसूलने में असफल रही . इसी माह आई “अँधा कानून” सिर्फ मुंबई में रिलीज हुई और फ्लॉप रही। 2 नवम्बर को आई “सेज तैयार सजनिया फरार” से दर्शक फरार रहे। छठ पर आई “नागिन” “लहू के दो रंग” और अंधी तूफान” में राजकुमार पाण्डेय की “नागिन” और लहू के दो रंग ने ही औसत व्यवसाय किया जबकि “अंधी तूफान” कुछ खास व्यवसाय नहीं कर सकी। बाद में आई “दामाद चाही फ़ोकट में” “बिगुल” “खुनी दंगल” “अंतिम तांडव” “का उखाड़ लेब” और “प्रेम लगन” कुछ खास नहीं कर सकी।

यह तो एक मोटा मोटी रिपोर्ट है . जरूरत है इनके सभी पक्षों पर विवेचना की . एक तो आजकल के कुछ निर्माता निर्देशकों को भोजपुरी में नाम हीं नहीं मिलता है .सोचना पड़ता है जब अनिल अजिताभ और अभय सिन्हा जैसे दिग्गज फिल्म का नाम रखते हैं “एक दूजे के लिए”. .पीछले वर्ष राजकुमार पाण्डेय ने भी एक फिल्म बनाई मै नागिन तू नगीना . मुझे समझ में नहीं आता भोजपुरी फिल्मों का नाम हिंदी क्यों ?

खैर इस लेखा जोखा के साथ कुछ अच्छी खबरें भी हैं . पिछले तीस वर्षो से भोजपुरी सिनेमा के अग्रणी अभिनेता कुणाल सिंह को भारत के माननीय राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने भोजपुरी सिनेमा में उन्हें अमूल्य योगदान के लिए दिनकर साहित्य सम्मान 2012 से विभूषित किया। भोजपुरी फिल्मों के प्रमोशन के लिए अमिताभ बच्चन का सहयोग व समर्थन भी काबिले तारीफ़ है . अमिताभ कहते है कि क्षेत्रीय फिल्मों को सहयोग और समर्थन की जरूरत है और यही कारण है कि वह ऐसी फिल्मों में काम के बदले कभी पैसा नहीं लेते.

इस वर्ष मैंने (मनोज भावुक ) भी सौगंघ गंगा मईया के और रखवाला नामक दो फिल्मों में काम किया और भोजपुरी फिल्म निर्माण को बहुत करीब से देखा। यहाँ की मायावी दुनिया से रू ब रू हुआ।

निष्कर्ष

भोजपुरी सिनेमा में भाषा की बहुत गड़बड़ी है। एक ही घर में चार भाई चार तरह की भोजपुरी बोल रहे हैं, जो कि बिल्कुल ही अव्यवहारिक है। मां के लिए बेटा हो का प्रयोग करता है, तो भाभी के लिए रे का। भोजपुरी में संबंध और संबोधन का निर्वाह होता है, जो कि फिल्मों में नहीं किया जा रहा है। गीतों में अश्लीलता और भोंडापन भरता जा रहा है। संगीत ज्यादातर घिसे-पीटे और कॉपी-पेस्‍ट टाइप के हैं। कई ऐसे गीतों को दर्शकों पर थोपा जाता है, जिसका फिल्म की कहानी से कोई लेना-देना नहीं होता। इन्‍हें देख के लगता है कि किसी साफ कपड़े में कोई पैबंद चिपका दिया गया है। भोजपुरी है कुछ भी चल जाएगा का फार्मूला अभी भी चल रहा है। भेड़-चाल अभी भी जारी है। अधिकांश फिल्‍में पूर्वाग्रह से आज भी ग्रसित है। अभी भी फिल्मों में ठाकुर साहब रेप करते हैं और लाला जी मुंशीगिरी करते दिख रहे हैं। भोजपुरी सिनेमा के लोगों को इस बात का ज्ञान कब होगा कि हमलोग दूसरी सहस्राब्दी के दूसरे दशक की शुरुआत कर चुके हैं। समय के साथ चलना पड़ेगा। भोजपुरी सिनेमा के शुरुआती दौर में गीतकार शैलेंद्र, मजरूह सुल्तानपुरी, अनजान … बीच के दौर में लक्ष्‍मण शाहाबादी ने जो गीत लिखे, वो आज भी गुनगुनाये जाते हैं। उन लोगों ने मनोरंजन के साथ ही सामाजिक सरोकारों का भी निर्वाह किया। समाज के प्रति जवाबदेह रहे। लेकिन अब ये सब खत्म होता दिख रहा है। मॉमेडी और रोमांस के नाम पर हिरोइन की ढ़ोंढी दिखाने में आज के ज्यादातर फिल्मकारों को परम सुख की प्राप्ति होती है। भोजपुरी क्षेत्र की राज्य सरकारें भी भोजपुरी फिल्मों को लेकर उदासीन रवैया अपनाये हुए हैं। जिन सिनमाघरों में भोजपुरी फिल्में दिखायी जाती हैं, उनकी तकनीकी व्यवस्था कैसी हैं, एकोस्टिक यानी ध्वनि तंत्र काम करता है कि नहीं … आवाज साफ सुनाई देती है या नहीं … लोग गाने को कान से नहीं, आंख से सुनते हैं – आखिर ऐसा क्यों? इससे सरकार को कोई मतलब नहीं है।

भोजपुरी फिल्म के उत्थान के लिए सरकारी सहयोग बहुत जरूरी है। साथ ही सरकार को एक ऐसी समिति का निर्माण करना होगा, जो कि भोजपुरी सिनेमा पर नजर रखे, अश्लीलता की परिभाषा और सीमा तय करे। अश्लील फिल्म बनाने वालों का खुल के विरोध करें और जो अच्‍छी फिल्म बना रहे हैं, उन्‍हें सम्मानित करें। इसके अलावा वो फिल्म को व्यापक स्तर पर और विश्व स्तर पर प्रचार-प्रसार करें। फिल्म में भाषा की गड़बड़ी रोकेने के लिए भाषाविद रखे जाएं। जो भी भोजपुरी फिल्मों में काम कर रहे हैं या करना चाहते हैं, वो भोजपुरी भाषा और उसकी टोन सीखें। विश्व स्तर पर भोजपुरी की पहचान भोजपुरी फिल्मों से ही मिली है। अब भोजपुरी सिनेमा भोजपुरी समाज की और भोजपुरिया लोगों की जो तस्वीर पेश करेगी, उसी रूप में और उसी नजर से दुनिया हमलोगों को देखेगी। भोजपुरी अलबम इंडस्ट्री ने भोजपुरी का मतलब ही वल्गर बना दिया है। आने वाली फिल्‍में भोजपुरी की गौरवशाली और वास्तविक तस्वीर पेश करेगी, यही उम्मीद है और यही कामना है।


संपर्क-
लेखक भोजपुरी के फिल्म-समीक्षक और जाने -माने कवि हैं तथा Anjan tv में Executive Producer है. इनसे manojsinghbhawuk@yahoo.co.uk पर या 09958963981 संपर्क किया जा

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मशहूर भोजपुरी राइटर और टेलीविजन पर्सनाल्टी मनोज भावुक अब भोजपुरी फिल्मों में भी नजर आने लगे हैं. वर्ष 2012 के शुरुआत में हीं इनकी पहली फिल्म ‘सौगंध गंगा मईया के’ रिलीज हुई. मनोज की दूसरी फिल्म ‘रखवाला’ अगले वर्ष 26 जनवरी को रिलीज होगी. ‘सौगंध गंगा मईया के’ की तरह ही रखवाला में भी मनोज ने एक ईमानदार पुलिस अधिकारी की भूमिका निभाई है.

भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के लिए नए नहीं हैं मनोज

a3मनोज बताते हैं, ”यह सच है कि अभिनय के माध्यम से फिल्मों में मेरी शुरुआत हुई है परन्तु भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री के लिए मै नया नहीं हूँ. डेढ़ दशक पुराना और गहरा नाता है. मनोज तिवारी, रवि किशन, निरहुआ, पवन सिंह, कुणाल सिंह, अभय सिन्हा, मोहन जी प्रसाद, रानी चटर्जी, रिंकू घोष, पाखी हेगड़े, संगीता तिवारी, अक्षरा, स्मृति, संजय पाण्डेय, अवधेश मिश्रा ….सभी परिचित व आत्मीय हैं लेकिन रखवाला में काम करने से दिनेश जी (निरहुआ ) और करीब आये. वे बहुत सरल और सहज हैं.” ‘सौगंध गंगा मईया के’ के निर्देशक हैं राजकुमार आर पाण्डेय और ‘रखवाला’ के निर्देशक हैं असलम शेख. मनोज कहते हैं कि दोनों भोजपुरी के बड़े निर्देशक हैं. इनके साथ काम करने का अनुभव सुखद रहा.

भोजपुरी सिनेमा के इनसाइक्‍लोपीडिया हैं मनोज

a4 मनोज मनोज ने भोजपुरी सिनेमा के बिखरे इतिहास को सहेजने और समेटने की सफल कोशिश की है और इस कोशिश में अमिताभ बच्चन, सुजीत कुमार, राकेश पाण्डेय, कुणाल सिंह, रवि किशन, मनोज तिवारी, कल्पना समेत 50 से ज्यादा फ़िल्मी हस्तियों का साक्षात्कार किया है. मनोज के शोध आलेख ‘भोजपुरी सिनेमा के विकास यात्रा’ की बुनियाद पर कई शोधार्थियों ने अपना शोध पूरा किया और कई लेखकों ने अपनी पुस्तकें लिखीं.
इसी वर्ष 2012 में मनोज ने भोजपुरी सिनेमा के इतिहास पर एक डाक्यूमेंट्री बनाई जिसमें 1948 से लेकर 2011 तक के फिल्मों पर विहंगम दृष्टि है और 20 बड़ी फ़िल्मी हस्तियों के बाइट्स हैं. 25 मार्च 2012 को दिल्ली में आयोजित विश्व भोजपुरी सम्मलेन के फ़िल्म सत्र में फिल्म, साहित्य, राजनीति और संगीत जगत की जानी मानी हस्तियों ने लाखों दर्शकों के साथ इस डाक्यूमेंट्री को देखा और सराहा. राष्ट्रपति सम्मान से सम्मानित भोजपुरी के महानायक कुणाल सिंह ने मनोज भावुक को ‘भोजपुरी सिनेमा का इनसाइक्लोपीडिया’ कहा. इस अवसर पर मनोज ने श्वेता तिवारी के साथ मिलकर विश्व भोजपुरी सम्मलेन का संचालन भी किया. मनोज को बेस्ट एंकर के सम्मान से नवाजा गया.

बहुमुखी प्रतिभा के धनी हैं मनोज

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मनोज यही नहीं पटना एफएमसीसीए के स्वर्णिम भोजपुरी समारोह में भोजपुरी सिनेमा में भाषा और महिलाओं की स्थिति विषय पर आयोजित सेमिनार का संचालन भी मनोज भावुक ने हीं किया। सेमिनार में पद्मश्री शारदा सिन्हा, सुपर स्टार मनोज तिवारी, रविकिशन, मालिनी अवस्थी, बीएन तिवारी, निर्माता अभय सिन्हा, टीपी अग्रवाल , निर्देशक अजय सिन्हा, विनोद अनुपम, लाल बहादुर ओझा और युवा निर्देशक नितिन चंद्रा ने अपने विचार रखे।

मुम्बई में आयोजित भोजपुरी सिटी सिने अवार्ड में कन्टेंट डिजाइन और एंकर लिंक मनोज भावुक ने हीं तैयार किया.
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मनोज कई टीवी चैनल्स पर बतौर भोजपुरी फिल्म एक्सपर्ट शिरकत करते रहे. हमार टीवी पर भोजपुरी सिनेमा के 50 साल और फिल्म विशेष नामक कार्यक्रम बहुत लोकप्रिय हुए जिसे मनोज होस्ट करते थे. फिल्म विशेष में पटना, दिल्ली और मुम्बई स्टूडियो में बैठे फिल्म सेलिब्रिटीज से एक साथ मनोज किसी फ़िल्मी मुद्दे पर या किसी फिल्म विशेष पर परिचर्चा करते थे.

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आज से 14 साल पहले मनोज ने अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य सम्मलेन के तत्वाधान में पटना में एक फिल्म सेमीनार का आयोजन किया और भोजपुरी सिनेमा के इतिहास पर पर्चा पढ़ा. यह कोई पहला आयोजन था जिसमें साहित्यकारों के साथ फिल्मकारों ने भी शिरकत किया.
मनोज का भोजपुरी सिनेमा और सिनेमा जगत से पुराना और गहरा सम्बन्ध रहा हैं. अपने अफ्रीका और इंग्लैण्ड प्रवास के दौरान भी मनोज भोजपुरी सिनेमा पर लिखते रहे. भोजपुरी फिल्म गंगा के रीलिज पर BBC के लन्दन स्टूडियो में मनोज से बात चीत भी की गई.

मनोज की प्रतिभा के कायल हैं मनोज!

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एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया के ऑफिसर्स क्लब में एक अविस्मरणीय घटना घटी . भोजपुरी सिनेमा के इस दौर के सुपर स्टार मनोज तिवारी से भोजपुरी सिनेमा के सफर पर बाइट लेने पहुंचे मनोज भावुक उनसे बात चीत में इतने तल्लीन हो गए कि पता हीं नहीं चला की कब और कैसे ढ़ाई घंटे बीत गए और वहाँ उपस्थित भीड भी pin drop silence के साथ इस फ़िल्मी चैट का आनंद लेती रही. मनोज कहते हैं की तिवारी जी जब मिलते हैं इस इंटरव्यू का जिक्र जरूर करते हैं.

अभिनय से पुराना रिश्‍ता है मनोज का

फिल्म की तरह अभिनय से भी मनोज का पुराना नाता है . मनोज पेरिस, यूनेस्को के बिहार केंद्र बिहार आर्ट थियेटर, कालिदास रंगालय, पटना द्वारा संचालित द्विवर्षीय नाट्यकला डिप्लोमा के टॉपर रहे हैं और अपने उत्कृष्ट अभिनय के लिए वर्ष 1999 के बिहार कलाश्री अवार्ड से नवाजे जा चुके हैं . वहाँ मनोज ने बकरा किस्तों का, मास्टर गनेसी राम, हाथी के दांत, नूरी का कहना है, बाबा की सारंगी, पागलखाना, ख्याति समेत दर्जनों नाटकों में अभिनय किया.

साहित्‍य और पत्रकारिता में रुचि ले गई बड़े पर्दे के नजदीक

16 वर्ष पूर्व पटना दूरदर्शन पर भोजपुरी साहित्यकारों और कलाकारों के साक्षात्कार से मनोज ने अपने पत्रकारीय करियर की शुरुआत की थी. फिर 1998 में भोजपुरी के प्रथम टीवी सीरियल ‘सांची पिरितिया’ में बतौर अभिनेता और 1999 में ‘तहरे से घर बसाएब’ टीवी सीरियल में बतौर कथा-पटकथा, संवाद व गीत लेखक जुड़े. वर्तमान में अंजन टीवी में बतौर एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर कार्यरत हैं.

मुसाफ़िर के रस्ते बदलते रहे

मनोज पेशे से इंजिनियर रहे हैं . कई मल्टीनेशनल कंपनियों में बतौर इंजिनियर काम कर चुके हैं . पर्ल पेट (मुम्बई), रवेंजोरी (कम्पाला, युगांडा, पूर्वी अफ्रीका) और हादम (इंग्लैंड) में एक दशक तक काम करने के बाद अपनी मातृभूमि और मातृभाषा के लिए स्वदेश वापस लौट आये . दो दशक पहले मनोज ने अपने करियर की शुरुआत मेडिकल और इंजीनियरिंग के छात्रों को केमेस्ट्री पढ़ाने से की . फिर रंगमंच, रेडियो , टीवी और पत्रकारिता से जुड़े और फिर इंजीनियरिंग से . .और वर्तमान में फिर टीवी चैनल से जुड़े हैं . मनोज कहते हैं ” हालांकि बार बार रास्ता बदलना ठीक नहीं है ..जर्क आता है …एनर्जी डिस्ट्रीब्यूट हो जाती है . कबीर दास ने कहा है ” एक साधे सब सधै , सब साधे सब जाय ” लेकिन क्या किया जाय – मुसाफ़िर के रस्ते बदलते रहे / मुकद्दर में चलना था, चलते रहे .

जब दिल में टीस उठती है

मनोज अभिनय और लेखन के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए भारतीय भाषा परिषद सम्मान , भाऊराव देवरस सेवा सम्‍मान,भिखारी ठाकुर सम्मान, राही मासूम रजा सम्मान, बेस्ट एंकर अवार्ड समेत दर्जनों सम्मानों से नवाजे गए हैं. वैसे तो मनोज दिल से शायर हैं. जब दिल में टीस उठती है या हलचल मचती है तो जज्बात तस्वीर जिन्दगी के और चलनी में पानी के रूप में कागज़ पर उतर हीं आते हैं लेकिन अब देखना यह है कि क्या अभिनय की दुनिया में भी मनोज भावुक वही मुकाम हासिल कर पाते हैं जो उन्होंने साहित्य की दुनिया में प्राप्त किया है .

Bhawuk on December 25th, 2012

हम चाहें न चाहें रह-रहकर पुरानी यादें आती हैं ..यह मानव जीवन का स्वभाव भी है कि वह अपने जीवन को और बेहतर बनाने के लिए अतीत में हुई यादगार और सुहावने घटनाक्रम को याद करता है. अतीत में घटी अच्छी घटना उसके लिए टॉनिक का काम करती है और वह इसी टॉनिक की सहायता से जीवन की सभी बड़ी मुश्किलों को आसानी से पार कर जाता है.

लेकिन दूसरी तरफ यह भी सच है कि अतीत की कई कड़वी यादें लाख कोशिश के बावजूद दिलों-दिमाग से पूरी तरह हटती हीं नहीं … खैर इन्हीं खट्टी -मिठ्ठी यादों से जीवन बनता है . मेरे लिए वर्ष 2012 अच्छा रहा . कुछ यादें साझा कर रहा हूँ –

1. गणतंत्र दिवस कविता उत्सव (15जनवरी, 2012) –

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गणतंत्र दिवस कविता उत्सव का आयोजन श्रीराम भारतीय कला केन्द्र, कॉपरनिक्स मार्ग, नई दिल्ली में किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप प्रो0 किरण वालिया, माननीय भाषा, समाज कल्याण तथा महिला एवं बाल विकास मंत्री, दिल्ली सरकार पधारीं। सान्निध्य अकादमी के उपाध्यक्ष डॉ0 गिरीश चन्द्र श्रीवास्तव का प्राप्त हुआ। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार श्री विवेकानन्द ने की। संचालन सुप्रसिद्ध कवि श्री रवीन्द्र जुगानी ने किया। इस अवसर पर श्री अनिल ओझा ‘नीरद’, श्री अविनाश, श्री कमलेश राय, श्री तारकेशवर मिश्र राही, श्री मनोज भावुक, श्री रचना योगेश, श्री रमाशंकर श्रीवास्तव, श्री सूर्यनाथ सिंह, श्री ज्ञानेन्द्र कुमार सिंह, श्री अग्निपुष्प , श्री कुमार मनीष अरविन्द, श्री कुमार राधा रमण, श्री मानवर्धन कण्ठ, श्री रवीन्द्र लाल दास, श्री राम लोचन ठाकुर, श्री विनीत उप्पल, डॉ0 शेफालिका वर्मा ने भोजपुरी एवं मैथिली भाषा में काव्य पाठ कर सभी का मन मोह लिया।

Video Link – गणतंत्र दिवस कविता उत्सव में काव्य पाठ करते हुए मनोज भावुक

2. भोजपुरी फिल्मों में प्रवेश-

nmRinku Ghosh, Manoj Bhawuk and Rinku Ghosh
News Link- I am not new to this industry: Manoj Bhawuk , मनोज भावुक का सेल्यूलाइड की दुनिया में प्रवेश
भोजपुरी टेलीविजन इंडस्ट्री के जाने – माने एंकर और सुप्रसिद्ध भोजपुरी कवि मनोज भावुक अब भोजपुरी फिल्मों में भी नजर आने लगे हैं.

वर्ष 2012 के शुरुआत में हीं इनकी पहली फिल्म रिलीज हुई जिसका नाम है ,सौगंध गंगा मईया के . दूसरी फिल्म ‘ रखवाला’ 26 जनवरी 2013 को रिलीज होने वाली है . दोनों हीं फिल्मों में मनोज ने एक ईमानदार पुलिस इंस्पेक्टर की भूमिका निभाई है . सौगंध गंगा मईया के के निर्देशक हैं राजकुमार आर पाण्डेय और ‘ रखवाला’ के निर्देशक हैं असलम शेख . मनोज कहते हैं कि दोनों भोजपुरी के बड़े निर्देशक हैं और इनके साथ काम करने का अनुभव सुखद है

3. दबंग चैनल पर बहुत ख़ूब में कविता पाठ –

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अधिकारी ब्रदर्स के दबंग चैनल पर बहुत ख़ूब नाम से कविता पाठ का एक लोकप्रिय कार्यक्रम हैं जिसे शैलेश लोढ़ा होस्ट करते हैं . मनोज भावुक बहुत ख़ूब के भोजपुरी बयार सेक्शन के पसंदीदा कवि हैं और कई बार काव्य पाठ कर चुके हैं .

4. विश्व भोजपुरी सम्मलेन /बेस्ट एंकर अवार्ड –

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मनोज भावुक को बेस्ट टीवी एंकर अवार्ड (मेल) और श्वेता तिवारी को बेस्ट टीवी एंकर अवार्ड (फीमेल) से सम्मानित किया गया . यह सम्मान उन्हें पूर्वांचल एकता मंच द्वारा दिल्ली में आयोजित ६ठवें विश्व भोजपुरी सम्मेलन में दिया गया. इस अवसर पर हिन्दी एवं भोजपुरी सिनेमा जगत की कई बड़ी हस्तियाँ सुनील सेट्टी, कुणाल सिंह, राजकुमार आर पाण्डेय, असलम शेख, कानू मुखर्जी, रानी चटर्जी, रिंकू घोष, संगीता तिवारी, स्मृति सिन्हा, सीमा सिंह, प्रिया शर्मा, सुजीत पुरी , अजय दीक्षित, सुदीप पाण्डेय, चिंटू पाण्डेय और संगीत जगत से उदित नारायण, भरत शर्मा व्यास, मालिनी अवस्थी, देवी, इन्दू सोनाली व अजीत आनंद आदि मौजूद थे .
इस दो दिवसीय विश्व भोजपुरी सम्मेलन का उदघाटन लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने किया . इस आयोजन में पहली बार सिनेमा पर ऐसा अद्भुत विशेष सत्र आयोजित किया गया था जिसमें लाखो की भीड़ में फिल्म समीक्षक मनोज भावुक द्वारा निर्मित भोजपुरी सिनेमा के 50 साल के सफ़र पर एक डोक्युमेंट्री भी दिखाई गई जिसे फिल्मकारों और दर्शकों ने खूब पसंद किया. कार्यक्रम का सफल संचालन मनोज भावुक एवं श्वेता तिवारी ने किया.

VIDEO – Documentary on History of Bhojpuri Cinema by Manoj Bhawuk
VIDEO – Vishwa Bhojpuri Sammelan

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5. राष्ट्रपति भवन में प्रवेश –

VIDEO – राष्ट्रपति भवन में प्रवेश

6. पूर्वांचल गौरव सम्मान –

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सुप्रसिद्ध भोजपुरी साहित्यकार मनोज भावुक को पूर्वांचल भोजपुरी महासभा , गाज़ियाबाद द्वारा 10 मार्च, 2012 को संस्था के सबसे प्रतिष्ठित अवार्ड पूर्वांचल गौरव सम्मान से सम्मानित किया गया। उन्हें यह सम्मान प्रदान किया गार्डेनिया ग्रुप के चेयरमैन मनोज राय ने। मनोज को यह सम्मान भोजपुरी की तमाम संस्थाओं के साथ साहित्यिक और सांस्कृतिक संबंधों को मजबूत बनाने की दिशा में किए गए प्रयास और उल्लेखनीय सेवा के लिए दिया गया है।

News Link- पूर्वांचल भोजपुरी महासभा ने किया मनोज भावुक को सम्मानित

VIDEO – पूर्वांचल गौरव सम्मान

7. ग़ाज़ियाबाद कवि सम्मलेन का संचालन –

gaziabad-kavi-sammelanगाज़ियाबाद में पहली बार भोजपुरी कवि सम्मलेन का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता वरिष्ठ कवि राजकुमार सचान ”होरी” तथा संचालन भोजपुरी के लोकप्रिय कवि मनोज भावुक ने किया. इस सम्मेलन के मुख्य अतिथि हिन्दी – भोजपुरी के सुप्रसिद्ध अभिनेता महाभारत के द्रोणाचार्य सुरेन्द्र पाल सिंह एवं विशिष्ठ अतिथि नवल कान्त तिवारी, निदेशक उत्तर प्रदेश राज्य सूचना केंद्र थे.
VIDEO – Manoj Bhawuk in Ghaziabad kavi sammelan

8. जंतर-मंतर पर धरना -प्रदर्शन –

पूर्वांचल एकता मंच द्वारा एवं भोजपुरी की अन्य कई संस्थाओं के संयुक्त तत्वाधान में भोजपुरी को संविधान की 8वीं अनुसूची में शामिल करने के लिए 29 अगस्त 2012 को जंतर-मंतर पर धरना -प्रदर्शन किया गया जिसका संचालन मनोज भावुक ने किया .
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VIDEO – जंतर-मंतर पर धरना -प्रदर्शन

9. हिंडन नदी के श्मशान घाट पर कवि सम्मलेन –

श्मशान घाट …अद्भुत अनुभव . पीछे चिताएं जल रहीं थीं और आगे कवि काव्य- पाठ कर रहे थे. बगल से कुछ लोग एक अर्थी लेकर भी गुजरे. पितृपक्ष के अवसर पर शायद यह विश्व का पहला और अनोखा आयोजन था . मनोज भावुक के अलावा जिन कवियों ने काव्य पाठ किया उनके नाम हैं – पंडित सुरेश नीरव (कादंबिनी), गीतकार डा० सुरेश, अरविंद पथिक, सतीश सागर, मोहन द्विवेदी, ब्रजेश भट्ट एवं हरपाल सिंह . परिकल्पना एवं संचालन – राजकुमार सचान ‘ होरी ‘ , अध्यक्षता – कृष्ण मित्र . धन्यवाद ज्ञापन – अशोक श्रीवास्तव . संयोजन – आचार्य मनीष . मुख्य अतिथि – महापौर तेलूराम कम्बोज .
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VIDEO – हिंडन नदी के श्मशान घाट पर कवि सम्मलेन

10. महुआ चैनल पर भउजी न0 1 में अतिथि जज –

31 अक्टूबर 2012 को महुआ के reality show भउजी नo 1 में बतौर Guest Judge मनोज भावुक शामिल …..

VIDEO – मूंछ वाली भउजी song by Manoj Bhawuk in Bhauji No 1

VIDEO – Manoj Bhawuk on the hot seat of judgement, Bahuji No 1

VIDEO – Babua Bhail Ab Seyan song by Manoj Bhawuk in Bhauji no 1

11. खुर्जा में आयोजितसम्मलेन में मुख्य अतिथि –

17 जुलाई , 2012 को कारगिल शहीद दाताराम के 13वें शहादत दिवस पर बतौर मुख्य अतिथि शामिल .

VIDEO – Manoj Bhawuk’s Poem Recitation on Kargil war – महतारी के अंतरात्मा
VIDEO – Manoj Bhawuk’s Poem Recitation on Kargil war – बढ़ जा बेटा लाहौर तक
VIDEO – Manoj Bhawuk’s Poem Recitation on Kargil war – लौटब त चौठारी होई
VIDEO – – Manoj Bhawuk’s Poem Recitation on Kargil war – थूरल मजबूरी बा
VIDEO – – तनी-तनी सा बात के by Manoj Bhawuk

12. HPLद्वारा आयोजित हिन्दी दिवस में मुख्य अतिथि

HPL, Ministry of Health & Family Walfare, Government of India द्वारा आयोजित हिन्दी दिवस में संस्था के Doctors , Biotechnologists , Chemists और Officers को बतौर Chief Guest संबोधित करते हुए मनोज भावुक

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VIDEO – Bhojpuri Poet Manoj Bhawuk’s exclusive speech on Hindi Divas at HPL,Ghaziabad.
VIDEO – क्या बोलूँ – Manoj Bhawuk reciting his poem on hindi divas
VIDEO – A Poem for Mothers by Manoj Bhawuk

13. अंतर्राष्ट्रीय किसान परिषद द्वारा विश्व पुस्तक मेले में सम्मानित –

विश्व पुस्तक मेला, दिल्ली में अन्तर्राष्ट्रीय किसान परिषद और नारायणी साहित्य अकादमी द्वारा आयोजित कार्यक्रम में मनोज भावुक को विश्व हिन्दी समिति के अध्यक्ष श्री दाउजी गुप्त के हाथों सम्मानित किया गया ।

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14. नंदू निकम्मा और खुदार के प्रीमियर में शामिल

Actress Monalisa, Director Ravi Sinha, Writer Rajesh Pandey and Film Critic Manoj Bhawuk at premiere of Bhojpuri film Khuddar in Navrang, Mumbai on 27th July 2012. — at MUMBAI.

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15. साहित्य- सृजन सम्मान –

साहित्य-संकुल, लोहटी , गोपालगंज द्वारा भोजपुरी काव्य और फिल्म समीक्षा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए मनोज भावुक को सुप्रसिद्ध आलोचक मैनेजर पाण्डेय के हाथों साहित्य- सृजन सम्मान दिया गया . मनोज भावुक की अनुपस्थिति में उनकी ओर से यह सम्मान युवा कवि अनूप पाण्डेय ने ग्रहण किया।

16. अभियान कार्यक्रम, मुम्बई –

अभियान द्वारा आयोजित कार्यक्रम में बतौर विशिष्ट अतिथि . मुख्य अतिथि दोपहर का सामना के सम्पादक डा0 प्रेम शुक्ल . अध्यक्ष -अमरजीत मिश्रा

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17. दीवाना आ गइल का लोकार्पण –

प्रेस क्लब ऑफ़ इंडिया, दिल्ली में भोजपुरी एलबम दीवाना आ गइल का लोकार्पण हुआ . इस एलबम के प्रोड्यूसर – मनोज जैसवाल, निर्देशक – दिलीप सिंह , संगीतकार – अखिलेश / सैंडी . गीतकार – मनोज भावुक / मनोज जैसवाल एवं गायक – मनोज जैसवाल, माधवी श्रीवास्तव एवं तृप्ति शाक्या हैं .
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18. छठ पूजा – कुंवर सिंह नगर, पूर्वांचल समिति द्वारा आयोजित छठ पूजा .

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19. मानव भूषण श्री सम्मान 2012-

मनोज भावुक को गगन स्वर ग़ाज़ियाबाद के तत्वाधान में प्रशंसनीय उपलब्धियों के लिए मानव भूषण श्री सम्मान 2012 की उपाधि से विभूषित किया गया .

20 . अंजन टीवी में एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर बने मनोज भावुक –

हमार टीवी के क्रिएटिव हेड मनोज भावुक ने इस्‍तीफा दे दिया है. वे यहाँ प्रोग्रामिंग कंटेंट और स्पेशल प्रोजेक्ट्स एंकरिंग का जिम्मा संभाल रहे थे. उन्‍होंने अपनी नई पारी अंजन टीवी के साथ शुरू की है. मनोज ने अंजन टीवी में एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर के पद पर ज्‍वाइन किया है. वे लगभग चार सालों से हमार टीवी को अपनी सेवाएं दे रहे थे . वे फिल्म, साहित्य, संगीत , कवि सम्मलेन के साथ सेक्सुअल प्रोब्लमस जैसे ज्वलंत मुद्दों पर जोरदार तरीके से एंकरिंग करते रहे हैं. भोजपुरिया दर्शकों के बीच उनकी एक अच्‍छी पहचान है.

News Link- Manoj Bhawuk teams up with Anjan TV
मनोज भावुक अंजन टीवी से जुड़े
अब अंजन टीवी पर दिखेंगे मनोज भावुक
अंजन टीवी में एग्‍जीक्‍यूटिव प्रोड्यूसर बने मनोज भावुक

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21-डाo राजेन्द्र प्रसाद जयन्ती समारोह का संचालन-

jayantiपूर्वांचल एकता मंच द्वारा गुड़गांव में आयोजित डाo राजेन्द्र प्रसाद जयन्ती समारोह के मुख्य अतिथि थे – हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला . कार्यक्राम का संचालन किया मनोज भावुक और टीवी एंकर प्रीती तिवारी ने . गायकों में मालिनी अवस्थी, राधा पाण्डेय , अंजना आर्या , मोहन राठौर , आलोक पाण्डेय , स्मिता सिंह आदि प्रमुख रहे . शिवाजी सिंह व संजय सिंह के देख रेख में सारा कार्यक्रम सफलता पूर्वक संपन्न हो गया .

22. गुड़गांव में आयोजित कवि सम्मलेन की अध्यक्षता –

gudgaonडाo राजेन्द्र प्रसाद जयन्ती के अवसर पर गुड़गांव में एक कवि सम्मलेन का आयोजन किया गया जिसकी अध्यक्षता मनोज भावुक और संचालन अनूप पाण्डेय ने किया . काव्य पाठ – बादशाह प्रेमी , माधुरी सिंह मधु , मृत्युंजय साधक , मोहन द्विवेदी , गुरुविंदर सिंह गुरु आदि कवियों ने काव्य पाठ किया .

समयाभाव एवं व्यस्तता की वजह से कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में नहीं जा सका. बलिया कवि सम्मलेन, साहित्य संकुल परिवार, गोपालगंज द्वारा आयोजित सम्मलेन, भिखारी ठाकुर महोत्सव, छपरा, भिखारी ठाकुर फेस्टिवल, आरा, मीडिया व्याख्यान सत्र हेतु वरिष्ठ पत्रकार अमिताभ अग्निहोत्री व एन .के सिंह के साथ अतिथि वक्ता के रूप में शिवानन्द द्विवेदी सहर के विनम्र आमंत्रण पर भी नहीं जा पाया.. भोजपुरी समाज के अध्यक्ष अजित दूबे जी के कई कार्यक्रमों में उपस्थित नहीं हो सका … कई महत्वपूर्ण सेमीनार, सम्मेलन व व्याख्यान समयाभाव की वजह से छूट गए जिसका अफसोस है .

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