पेट से जुड़े बिना भोजपुरी का विकास संभव नहीं : मनोज भावुक

दैनिक जागरण पर

आरा, एक प्रतिनिधि : भोजपुरी के विकास के लिए हमें भी अपने को अपटूडेट करना होगा। अंग्रेजी-हिन्दी मिश्रित भोजपुरी को स्वीकार करना होगा। हमें मध्यम मार्ग अपनाना होगा। पुरानी परंपरा लोक गीत, लोक कथा आदि को संरक्षित करते हुए नये युग की मांग को स्वीकार करना होगा, वरना हम बहुत पीछे छूट जायेंगे। उक्त बातें विश्व भोजपुरी सम्मेलन, दिल्ली के अध्यक्ष व भोजपुरी के प्रख्यात साहित्यकार मनोज भावुक ने अखिल विश्व भोजपुरी समाज मंच के बैनर तले स्थानीय हर प्रसाद दास जैन धर्मशाला के सभागार में आयोजित ‘भोजपुरी : दशा अउर दिशा’ विषयक विचार-गोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि कही। श्री भावुक ने भोजपुरी के लिए अफ्रीका व ग्रेट ब्रिटेन में किये गये अपने प्रयासों का उल्लेख किया और कहा कि पेट से जुड़े बिना भोजपुरी का विकास संभव नहीं है। जब तक भोजपुरी क्षेत्र का आर्थिक विकास नहीं होगा, तब तक भोजपुरी साहित्य और समाज का वास्तविक विकास संभव नहीं है। श्री भावुक ने 8 वीं अनुसूची के मुद्दे पर कहा कि भारत की समस्त भोजपुरी संस्थाएं अपने-अपने क्षेत्र में एक ही दिन, एक ही साथ और एक ही सुर में आंदोलन करें, तभी सरकार जागेगी और भोजपुरी को उसका वाजिब हक मिलेगा। श्री भावुक ने कहा कि अपने अधिकार के लिए टुकड़े-टुकड़े में आंदोलन करने का कोई महत्व नहीं है। हमें एक साथ आंदोलन करने से ही सफलता मिलेगी। कोशिश करें कि विदेशों में फैले भोजपुरी भाषी भी हमारे साथ हों। तब हमें अपना कई दशकों से प्रतीक्षित अधिकार मिलेगा। श्री भावुक ने अपनी रचनाएं भी प्रस्तुत की। डा. रणविजय कुमार ने भोजपुरी के मान-सम्मान के लिए चट्टानी एकता का परिचय देने का आह्वान किया। सुधीर कुमार ने भोजपुरी गीतों में बढ़ रही अश्लीलता पर चिंता प्रकट की। अन्य वक्ताओं में कृष्णकांत तिवारी, शिवदास सिंह, प्रमोद कुमार सिंह, हरिद्वार प्रसाद किसलय, शमशाद ‘प्रेम’, वीरकंडे प्रसाद, अतुल प्रकाश, रामयश अविकल, राजेन्द्र मिश्र, बृज बिहारी सिंह, अभिनव, ए.के. आंसू आदि थें। वहीं हीरा ठाकुर, दुखन पासवान आदि ने गीत प्रस्तुत किया। गोष्ठी का उद्घाटन प्रो. कमलानंद सिंह, मंच संचालन कवि नंद किशोर ‘कमल’, अध्यक्षता मंच के जिलाध्यक्ष प्रो. के.के.सिंह और धन्यवाद ज्ञापन मंच के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ब्रजेश सिंह ने किया।




Tags: