http://www.anubhuti-hindi.org/sankalan/mamtamayi/maa1.htm

हज़ारों दुखड़े सहती है माँ
फिर भी कुछ ना कहती है माँ

हमारा बेटा फले औ फूले
यही तो मंतर पढ़ती है माँ

हमारे कपडे, कलम औ काँपी
बड़े जतन से रखती है माँ

बना रहे घर, बंटे न आँगन
इसी से सबकी सहती है माँ

रहे सलामत चिराग घर का
यही दुआ बस करती है माँ

बढे उदासी मन में जब-जब
बहुत याद में रहती है माँ

नज़र का काँटा कहते हैं सब
जिगर का टुकड़ा कहती है माँ

मनोज मेरे ह्रदय में हरदम
ईश्वर जैसी रहती है माँ

http://www.anubhuti-hindi.org/kavi/m/manoj_bhawuk/Index.htm