आज भोजपुरी के शेक्सपियर पदमश्री भिखारी ठाकुर का जन्मदिन है …उनकी पावन स्मृति को नमन करता हूँ . अपने समय में भिखारी ठाकुर को जो लोकप्रियता मिली थी , वह बहुत कम लोगों को नसीब होती है . भिखारी आज भी उतने हीं प्रासंगिक हैं जितने कल थे . समस्याएं और चुनौतियां आज भी हैं सिर्फ उनका स्वरुप बदला है . तब लोग कलकत्ता जाते थे ..अब दुबई ……पर पीड़ा वही है …रेलिया ना बैरी, जहजिया ना बैरी, पिया पइसवा बैरी ना …. खैर . आजकल लोगों की दिलचस्पी भिखारी ठाकुर में बढ़ती हीं जा रही है …सरकार भले उनके लिए कुछ न करे . लोग जागरूक हैं . गत वर्षों में भिखारी ठाकुर पर केन्द्रित कुछ कार्यक्रमों में मै भी शामिल हुआ . (आज छपरा वाले कार्यक्रम के लिए भी वैष्णवी का आमंत्रण है पर समयाभाव की वजह से शामिल नहीं हो पा रहा हूँ . कार्यक्रम की सफलता की कामना करता हूँ .) उनके vedios आपके साथ साझा कर रहा हूँ .

bhikhari thakur

दिल्ली के राजेन्द्र भवन में भिखारी ठाकुर राष्ट्रीय प्रतिष्ठान द्वारा आयोजित संगोष्ठी में बोलते हुए मनोज भावुक

http://www.youtube.com/watch?v=eHBc6cEsCrw

विश्व भोजपुरी उत्थान कल्याण समाज तथा राइटर्स एंड जर्नलिस्ट एसोशिएशन के संयुक्त तत्ववाधान में कलामंदिर आडिटोरियम, कोलकाता में भिखारी ठाकुर फेस्टिवल

http://www.youtube.com/watch?v=C_Itx2ixzlU

http://www.youtube.com/watch?v=db2oo2IqIxQ

http://www.youtube.com/watch?v=kTp5CdJuTu0

http://www.youtube.com/watch?v=0Tt1n8h4HiI

भिखारी ठाकुर

जन्म: 18 दिसंबर 1887
निधन: 10 जुलाई 1971
जन्म स्थान कुतुबपुर दियरा, ज़िला सारण, बिहार
कुछ प्रमुख

कृतियाँ बिरहा-बहार, विदेशिया, कलियुग बहार, हरिकीर्तन, बहरा-बहार, गंगा-स्नान, विधवा-विलाप, पुत्रवध, ननद-भौजाई, भाई-विरोधी, बेटी-वियोग, नाई बहार, श्रीनाम रत्न, रामनाम माला, शंका समाधान, नर नव अवतार, नक़ल भांड अ नेटुआ के।

बहुत कम लोग होते हैं जो जीते-जी विभूति बन जाते हैं

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