चारे दिन के मुलाक़ात में
लव भइल बात ही बात में

कैद हो गइनी अचके में हम
उनका दिल के हवालात में

आँख में हमरा उमड़ल घटा
डूब गइलें ऊ बरसात में

प्यार ना हs त का ई हवे
जिक्र बा तहरे हर बात में

मांग अब तू सजा दs ’मनोज’
कब ले जीयब खयालात में

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