Apr
12
चारे दिन के मुलाक़ात में
लव भइल बात ही बात में
कैद हो गइनी अचके में हम
उनका दिल के हवालात में
आँख में हमरा उमड़ल घटा
डूब गइलें ऊ बरसात में
प्यार ना हs त का ई हवे
जिक्र बा तहरे हर बात में
मांग अब तू सजा दs ’मनोज’
कब ले जीयब खयालात में


