Apr
12
रूप के धाह में ज़रा गइलू
बाप रे बाप ! तू मुआ गइलू
अनसोहातो तू मुस्कुरा गइलू
मन के छुअलू आ मन के भा गइलू
हम त सुख-चैन से रहीं जीयत
राह में तू कहाँ से आ गइलू
हम ज़माना से दूर हो गइनी
जब से हियरा में तू समा गइलू
आज मन बा उदास भावुक के
अच्छा कइलू कि पास आ गइलू


