रूप के धाह में ज़रा गइलू
बाप रे बाप ! तू मुआ गइलू

अनसोहातो तू मुस्कुरा गइलू
मन के छुअलू आ मन के भा गइलू

हम त सुख-चैन से रहीं जीयत
राह में तू कहाँ से आ गइलू

हम ज़माना से दूर हो गइनी
जब से हियरा में तू समा गइलू

आज मन बा उदास भावुक के
अच्छा कइलू कि पास आ गइलू

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