खिलने दो खुशबू पहचानो, कलियों को मुसकाने दो आने दो रे आने दो, उन्हें इस जीवन में आने दो जाने किस-किस प्रतिभा को तुम गर्भपात मे मार रहे हो जिनका कोई दोष नहीं, तुम उन पर धर तलवार रहे हो बंद करो कुकृत्य – पाप यह, नयी सृष्टि रच जाने दो आने दो रे आने […]

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– मनोज भावुक अबकी दियरी के परब अइसे मनावल जाये। मन के अँगना में एगो दीप जरावल जाये।। रोशनी गाँव में, दिल्ली से ले आवल जाये। कैद सूरज के अब आजाद करावल जाये।। हिन्दू, मुसलिम ना, ईसाई ना, सिक्ख, ए भाई। अपना औलाद के इंसान बनावल जाये।। जेमें भगवान, खुदा, गॉड सभे साथ रहे। एह […]

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बसंत आया, पिया न आए, पता नहीं क्यों जिया जलाये पलाश-सा तन दहक उठा है, कौन विरह की आग बुझाये हवा बसंती, फ़िज़ा की मस्ती, लहर की कश्ती, बेहोश बस्ती सभी की लोभी नज़र है मुझपे, सखी रे अब तो ख़ुदा बचाए पराग महके, पलाश दहके, कोयलिया कुहुके, चुनरिया लहके पिया अनाड़ी, पिया बेदर्दी, जिया […]

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