गजल

कैद सूरज के अब आजाद करावल जाए साखी पर मनोज भावुक और उनकी भोजपुरी गजलों पर तो विद्वानों और रचना धर्मियों ने गहन चर्चा की ही, उनके बहाने भाषा-बोली के फर्क पर, विमर्श में गंभीरता और चुहलबाजी  के ताल-मेल पर, सलिल जी की बुद्धिसंपन्नता किंवा मूढ़ता पर और  चर्चा शब्द के लिंग पर भी जमकर […]

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Bhawuk on August 21st, 2010

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